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Mata banke beti janke Ragni Lyrics – Lakhmi Chand

Ho Piya Bhid M Padi Ragni Lyrics - Lakhmi Chand

Mata banke beti janke Lyrics – Lakhmi Chand – More About Lakhmi Chand :- Born in 1901 in the house of Udmiram, an ordinary farmer of Jati village in Sonipat district. The family had to endure opposition to get into the field of art. With his singing skills, he popularized ragani not only in Haryana but also in the surrounding states. Composed more than twenty songs. Nautanki and royal woodcutter particularly famous. Deeply influenced the society and culture of Haryana. He died in 1945. The Haryana Sahitya Academy has published the Lakhmichand Bibliography.

Singer – Lakhmi Chand
Album –
Lyricist – Lakhmi Chand

Mata banke beti janke Ragni Lyrics – Lakhmi Chand

माता बणकै बेटी जणकै बण मैं गेर गई 
पत्थर केसा दिल करके नै तज बेटी की मेर गई 

नौ महीने तक बोझ मरी और पेट पाड़ कै जाई 
लहू की बून्द गेर दी बण मैं शर्म तलक न आई 
न्यारी पाट चली बेटी तै करली मन की चाही 
पता चल्या न इसी डाण का गई कौणसी राही 
ऊंच नीच का ख्याल करया ना धर्म कर्म कर ढेर गई 

लड़की का के खोट गर्भ तै लेणा था जन्म जरुरी 
नो महीने मैं पैदा हुई और कोन्या उमर अधूरी 
इसी मां कै होणा था जो बेअक्कल की कमसहूरी 
या जीवै जागै सफल रहै भगवान उमर दे पूरी 
जननी बणकै बेटी सेती किस तरियां मुंह फेर गई 

मनै ज्यान तै प्यारी लागै पालन पोषण करूं इसका 
कती नहीं तकलीफ होण दयूं पेटा ठीक भरूं इसका 
पुत्री भाव नेक नीति बण आज्ञाकार फिरूं इसका 
शकुन्त पक्षी का पहरा सै तै शकुंतला नाम धरूं इसका 
‘लखमीचन्द’ कहै दया नहीं आई दिन मैं कर अंधेर गई

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