गुलज़ार शायरी

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gulzar poetry

जिंदगी जीना है तो तकलीफ उठानी पड़ेगी ही,

वरना मरने के बाद जलने का एहसास तक नहीं होता!

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नजरों का खेल ही तो था सरकार……

तुम चुरा ना सकी और हम हटा नही सके !!

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तुझको पाने की ख्वाहिश दिल मे लेकर घूम रहे है,

बस अपनी हकीकत से यूँ ही रोज मुह मोड रहे है!

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तुम बस चलते जाओ..

या तो मंजिल मिल जाएगी या मुसाफिर बन जाओगे!

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इम्तिहान में आए मुश्किल सवाल सा हू मैं

हर किसी ने मुझे छोड़ा है बिना समझे ही!

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मोहब्बत को बुरा क्यू कहु जब किस्मत ही मेरी खराब है,

वो जा रहे हैं तो जाने दो, मेरे पास मेरी शराब है!