गुलज़ार शायरी

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gulzar poetry

सूरज के सामने कभी रात नहीं होती,

श्मशान में जाने के बाद मुलाकात नहीं होती

लोगों को देख कर मत आंका करो जनाब,

तुम्हें नहीं पता कि वो खुद के अन्दर

कैसी जंग लड़ रहे हैं

gulzar poems in english

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कुछ हार गयी तकदीर कुछ टूट गए सपने,

कुछ गैरों ने बर्बाद किया कुछ छोड़ गए अपने!

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कब छोडेंगी तेरी यादें मुझे….

मैं हर कहीं तुमको ही पाता हूँ,

गम बहुत है मेरे पास….

थोड़े से बेचना चाहता हूं!

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तुम पर भी यकीन है मौत का भी ऐतबार है

देखते है तुम दोनों में पहले कौन मिलता है,

मुझे दोनों का इंतजार है!

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जिंदगी ने सवाल बदल दिए, समय ने हालत बदल दिए,

हम तो वही है यारों पर लोगो ने अपने ख़्याल बदल दिए!