गुलज़ार शायरी

82 / 100 SEO Score
gulzar poetry

एक हसरत थी कि कभी हमे भी मनाये वो,

पर ये दिल कम्बख्त कभी उनसे रूठा ही नहीं!

gulzar poetry
Gulzar Poetry

डर लगता है कि कहीं खो ना दूँ तुम्हें,

सच ये भी है कि कभी पाया ही नहीं तुम्हें

Gulzar Quotes

gulzar poetry
Gulzar Poetry

इस दुनिया मे कोई किसी का हमदर्द नहीं होता,

लाश को शमशान में रखकर अपने लोग ही पुछ्ते हैं।

“और कितना वक़्त लगेगा”

gulzar romantic poetry in hindi

gulzar poetry
Gulzar Poetry

मौसम भी कुछ तुम जैसा हो गया है,

इशारों में कुछ और, अदाएं कुछ और पहन रखी है!

gulzar poetry

“पूरी दुकान बिक जायेगी मुँह-मांगी कीमत पर,

जिस दिन दर्द-ए-दिल की दवा बाज़ार में आयेगी !!”

gulzar poetry

कौन पूछता है पिंजरे में बंद पंछियों को,

याद वही आते हैं, जो उड़ जाते हैं…!