गुलज़ार शायरी

82 / 100 SEO Score

मुझे जमीर बेचना नहीं आया,

वर्ना दौलत कमाना इतना मुश्किल भी नहीं

gulzar poetry

हम अपनों से परखे गए हैं कुछ गैरों की तरह,

हर कोई बदलता ही गया हमें शहरों की तरह….!

gulzar poetry

रखकर तेरे होने पे यकीन ऐ_खुद…!!

हम भी मोहब्बत किसी से बेपनाह कर बैठे..!!!

gulzar poetry

अहमियत हैसियत को मिलती है,

और हम हैं कि जज्बात लिए फिरते हैं…..!

gulzar poetry

शिकवे भी हों, शिकायत भी हों,मेरा ऐतबार कर लेना…..!

नज़रों से कभी हो जाऊं ओझल, मेरा इंतजार कर लेना…….!!

gulzar poetry

लब तो खामोश रहेंगे….ये “वादा” है मेरा  “तुमसे”…..

अगर “कह” बैठी …कुछ “निगाहें” … तो “खफा” मत होना….!

love shayari Images