गुलज़ार शायरी

82 / 100 SEO Score
gulzar poetry

तुमको ग़म के ज़ज़्बातों से उभरेगा कौन,

ग़र हम भी मुक़र गए तो तुम्हें संभालेगा कौन!.!

gulzar poetry

हम जैसे लोगो का अब रोना क्या मुस्कुराना क्या,

जब चाहने वाला कोई ना हो तो जीना क्या और मरना क्या….

gulzar poetry

इश्क हुआ है तुझसे

बस यही खता है मेरी,

तु मोहब्बत है

और तु ही कमजोरी !

gulzar poetry

तन्हाई अच्छी लगती है

सवाल तो बहुत करती

पर,……

जवाब के लिए

ज़िद नहीं करती…

gulzar poetry

इतना प्यार दिखती हो.. अच्छा एक बात बताओगी,

कभी तुम्हारे शहर आया तो चाय पिलाओगी?

gulzar poetry

मैं सारी बहस बस जीतने ही वाला था कि,

उसने दोनों हाथ उठा कर बाल बांधने शुरू कर दिये..❤️