गुलज़ार शायरी

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Gulzar Poetry

सोचा था लिखूंगा तेरे और मेरे वफ़ा के किस्से,

पर यार तूने तो स्याही में ही बेवफ़ाई घोल दी!

gulzar poetry

बेपनाह चाहने से लेकर बेपरवाह

हो जाने तक का सफर इश्क होता है!

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Gulzar Poetry

मेरा पूरा दिन सुस्ती में ही बीत जाता है,

पर जब तुम से मिलता हूँ तो ये दिल स्वस्थ हो जाता है

शायद ये ही इश्क़ है

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हो नसीब में तुम पता नही हमे

बस एक उम्मीद पे जीता हुँ।

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कुछ बात बिगड़ती सी, कुछ बात सुलझती सी।
कुछ अपनी सी,
कुछ पराई सी
जिंदगी है जनाब,!!!
ये हर रोज साज़ बदलती है।

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Gulzar Sahab Quotes

आने वाले जाने वाले हर ज़माने के लिए

आदमी मज़दूर है राहें बनाने के लिए

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Gulzar Poetry

“बेरोज़गार” सी हो गई है ज़िन्दगी अपनी

मोहब्बत की नौकरी पर रख लो मुझे